चंद्रदेव का जन्म और परिवार

- चंद्रदेव का जन्म ऋषि कश्यप और माता अदिति से हुआ।
- वे अदित्यों में से एक हैं।
- चंद्रदेव की पत्नी रूही/रजनी/रूपमती मानी जाती है।
- उनके पुत्रों में कई ग्रह और रजत/धातु संबंधी देवता शामिल हैं।
महत्व: चंद्रदेव को सौम्य, शांत और भावनाओं को नियंत्रित करने वाला देवता माना जाता है।
2. सोमवार व्रत और चंद्रदेव की कथा
🔹 कथा सार
- राजा और साधु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सोम (चंद्र) की पूजा करते थे।
- एक राजा ने नियमित सोमवार व्रत किया और चंद्रदेव ने उसे स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति दी।
- इस कथा के अनुसार सोमवार व्रत से सर्व रोग, मानसिक क्लेश और आर्थिक कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
3. चंद्रदेव और रुक्मिणी / पार्वती की कथा
- कुछ पुराणों में कहा गया है कि चंद्रदेव ने ग्रहों और देवियों की शादी में मध्यस्थता की।
- उन्होंने रजनी और सूर्यदेव की छाया को शांत किया।
- यह कथा चंद्रदेव के सौम्य और शांत स्वरूप को दर्शाती है।
4. चंद्रदेव और शनि देव की कथा
- शनि देव और चंद्रदेव की एक कथा में कहा गया है कि शनि की प्रतिकूलता चंद्र के प्रकाश को प्रभावित करती है।
- इसलिए ज्योतिष में चंद्र और शनि की दशा देखकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाता है।
- यह कथा चंद्रदेव को मानसिक और भावनात्मक संतुलन देने वाले देवता के रूप में प्रस्तुत करती है।
5. चंद्रदेव और महाभारत/रामायण
- रामायण: जब रावण ने सीता का अपहरण किया, तो रात में चंद्रदेव ने सौम्य प्रकाश देकर राम और हनुमान को मार्ग दिखाया।
- महाभारत: पांडवों और ऋषियों ने चंद्र की पूजा कर रात्रि में युद्ध की योजना और मनोबल प्राप्त किया।
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🌟 चंद्रदेव से जुड़ी विशेषताएँ
- सौम्य और शांत स्वभाव के देवता।
- भावनाओं और मानसिक शक्ति के नियंत्रक।
- सोमवार व्रत और पूजा से स्वास्थ्य, धन और मानसिक शांति।
- रात्रि में प्रकाश, मार्गदर्शन और संकट निवारण।